हल्द्वानी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर एक ओर दावों-वादों से भरे कई कार्यक्रम हुए और कई आयोजनों में महिलाओं का सम्मान भी किया गया तो दूसरी ओर यहां महिलाएं अपने अधिकारों और सुरक्षा समेत अन्य सवालों पर आवाज उठाती नजर आईं। महिलाएं यह कहती दिखीं कि अब भाषणों की नहीं आचरण की जरूरत है। 

हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में रविवार को प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और प्रगतिशील भोजन माता संगठन के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने अपने अधिकारों, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मांग को मजबूती से उठाया।
कार्यक्रम में विश्व के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे युद्धों व अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के दौरान मारे गए बच्चों, महिलाओं समेत 165 लोगों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। 

इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस के कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसमें कामगार महिलाओं की स्थिति, उनके अधिकारों और उनके सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान नए श्रम कानूनों के तहत महिलाओं से रात के समय काम करवाने का विरोध किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रात की पाली में काम करना महिलाओं की सेहत सुरक्षा और बच्चों की देखभाल के लिहाज से अमानवीय है। 

वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में मेहनतकश महिलाओं की हालत अभी भी बेहद गंभीर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कठोर काम, कम मानदेय, असुरक्षित वर्क प्लेस, सामाजिक भेदभाव और उत्पीड़न जैसी समस्याएं आज भी बड़ी संख्या में महिलाओं को झेलनी पड़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि भोजनमाताओं से 3000/महीने के नाममात्र के मानदेय पर माली, सफाई कर्मी, चौकीदार और चपरासी के काम भी करवाए जाते हैं। वक्ताओं ने कहा कि तमाम सरकारी दावों के उलट सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं को ध्यान में रखते हुए शौचालयों की व्यवस्था नहीं है और सुरक्षा के इंतजाम भी लचर  हालत में हैं। 

Uttarakhand में महिला हिंसा के बढ़ते मामलों पर भी दिखी चिंता

सभा में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामलों ने पूरे समाज को झकझोर दिया है जिसके बावजूद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। वक्ताओं ने कहा कि हाल ही में देहरादून में एक महिला जज की हत्या की घटना और कई महिलाओं की दिन दहाड़े हत्या के मामलों ने भी कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 

वक्ताओं ने कहा कि जब तक महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, सम्मानजनक रोजगार और समान अधिकार नहीं मिलते तब तक वास्तविक समानता संभव नहीं है। उन्होंने सरकार से महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर सख्त कार्रवाई करने, कामगार महिलाओं को सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा दिए जाने और वर्क प्लेस पर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

वीडियो में देखें महिलाओं ने क्या कहा?

ये लिया गया संकल्प

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने महिला हिंसा के खिलाफ समान अधिकार, सम्मान और सुरक्षा के लिए संघर्ष को और मजबूत करने का संकल्प लिया। महिलाओं ने समाज में न्याय, समानता और शांति के लिए बढ़-चढ़कर भूमिका निभाने की बात दोहराई। 

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम का समर्थन करने के लिए पछास, क्रालोस, मेडिकल एसोसिएशन के लोग मौजूद रहे। प्रगतिशील महिला एकता केंद्र और भोजनमाता यूनियन से चंपा गिनवाल, बीना देवी, बबीता पांडे, तुलसी देवी, किरण नेगी, धनौली देवी, ममता देवी, परवीन, शहाना, सीता देवी, गंगा देवी मीना, आरती ,ममता मेहता लीला देवी, कुंती, कमला, रजनी आरती समेत कई अन्य  महिलाएं भी सभा में शामिल हुईं।

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