Category: पाठक उवाच

प्रिय भावना! (भावना के नाम एक आम नागरिक का खत)

प्रिय भावना! कैसी भावना हो तुम! जो एक “कॉमेडियन” के दिए व्यंग्यात्मक बयान पर तो भड़क जाती हो मगर राम मंदिर में हुए घपले पर नहीं भड़कती, तब तुम्हारे मुंह…

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