हल्द्वानी। भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी, जिला सचिव कैलाश पांडेय और राज्य कमेटी के सदस्य केके बोरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की। इसके साथ ही समेत राज्य में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार समेत अन्य मामलों को लेकर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय का संघर्ष अभी लंबा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक असंबद्ध शिकायतकर्ता की शिकायत पर सीबीआई जांच की संस्तुति करना और अंकिता के माता-पिता को इस प्रक्रिया से बाहर रखना यह दर्शाता है कि उत्तराखंड की बीजेपी सरकार इस मामले में वीआईपी बताए जा रहे लोगों को बचाने की अभी भी पूरी कोशिश कर रही है। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की। राज्य को बनाया जा रहा सांप्रदायिक नफरत की प्रयोगशाला: मैखुरी इसके साथ ही भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि उत्तराखंड में लगातार सांप्रदायिक उन्माद भड़काने की कोशिश की जा रही है। बकौल मैखुरी, अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध करने वालों को सत्ता का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर आए दिन अल्पसंख्यकों के प्रति उनके द्वेष प्रकट करने वाली भाषा बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शांत और सौहार्दपूर्ण राज्य को सत्ता के लाभ के लिए सांप्रदायिक नफरत की प्रयोगशाला में तब्दील करने की कोशिश निंदनीय है। कानून व्यवस्था हुई चौपट: मैखुरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि उत्तराखंड में आए दिन होने वाली आपराधिक घटनाएं बता रही हैं कि कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी समेत प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में पिछले दिनों हत्याकांड हुए हैं जो चिंताजनक स्थिति है। बकौल मौखुरी, योजना बनाकर किए जाने वाले अपराधों की भनक पुलिस को न लगने से पता चलता है कि राज्य में इंटेलिजेंस का तंत्र प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि अपराध पर लगाम लगाने के ठोस उपाय करने की जरूरत है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ अपराध करने वालों को राजनीतिक संरक्षण दिया जाना बंद होना चाहिए। ‘पार्टी 50 साल से रही है बिंदुखत्ता के लोगों की लड़ाई की ताकत’ इंद्रेश मैखुरी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनकी पार्टी पिछले 50 साल से बिंदुखत्ता के लोगों की लड़ाई कंधे से कंधा मिलाकर लड़ रही है। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता का मामला अब तक हल न होना सरकारों के उपेक्षापूर्ण रवैये का नतीजा है। उन्होंने आगे कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने के नाम पर वोट मांगने वाली बीजेपी लोगों को आए दिन झुनझुना पकड़ा रही है। बकौल मैखुरी, बिंदुखत्ता के मामले में सीएम की घोषणा भी ठंडे बस्ते में चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोषणा पर सरकार ने काम ही नहीं किया। उन्होंने इसे लोगों के साथ छल करार देते हुए बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता, पुछड़ी, बागजाला और ऋषिकेश के बापू ग्राम जैसे तमाम इलाकों के लोगों को जमीन का मालिकाना हक मिलना चाहिए। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा मैखुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी घेरा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में उच्च पदों पर नियुक्ति में भ्रष्टाचार चरम पर है। उन्होंने कहा कि बीते दिनों ही हाइकोर्ट ने पिटकुल के प्रबंध निदेशक पद पर प्रकाश चंद्र ध्यानी की नियुक्ति को नियम के खिलाफ करार देते हुए उन्हें पद से हटाने का आदेश दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार लगातार विवादास्पद, भ्रष्टाचार के आरोपी और अयोग्य अफसरों की तैनाती पिटकुल व यूपीसीएल में कर रही है। बकौल मैखुरी, मुख्यमंत्री धामी की सरकार को बताना चाहिए कि उन्हें विवादास्पद, भ्रष्टाचार के आरोपियों और आरोग्य अफसर ही क्यों पसंद हैं। गैरसैंण पर बीजेपी विधायक का बयान निंदनीय: मैखुरी इंद्रेश मैखुरी ने लैंसडाउन से बीजेपी विधायक महंत दिलीप रावत के उस बयान की निंदा की है जिसमें उन्होंने भराड़ीसैंण में ऑक्सीजन कमी और ठंड होने का दावा किया था। मैखुरी ने कहा कि राज्य की जनता उत्तराखंड आंदोलन के समय से ही गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की मांग करती रही है। उन्होंने रावत के बयान को इस मांग के साथ छल करने का पैंतरा करार दिया है। Post navigation Chamoli: जायजा लेने अस्पताल पहुंचे CM, कहा- सब को अच्छा इलाज दिलाना लक्ष्य Haridwar अर्द्धकुंभ 2027: ₹234.55 करोड़ के निर्माण कार्यों का शिलान्यास