भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों से जुड़े संगठन ‘ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन’ (AISBISF) ने 25 और 26 मई को हड़ताल पर रहने की घोषणा की है। संगठन ये हड़ताल अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर आहूत की है।

भारतीय स्टेट बैंक स्टाफ एसोसिएशन दिल्ली सर्किल के अध्यक्ष कुलदीप सिंह बवेजा ने हल्द्वानी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि कर्मचारी 15 मांगों को लेकर यह हड़ताल करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुमाऊं परिक्षेत्र में SBI की 192 ब्रांच हैं, जिनमें करीब 1200 कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि 25 और 26 मई को सभी कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे। बकौल बावेजा, इससे कुमाऊं परिक्षेत्र में बैंक का करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

बावेजा के मुताबिक, इससे पहले SBI के कर्मचारी संगठन के बैनर तले 18 मई को कुसुमखेड़ा स्थित SBI के प्रशासनिक भवन में धरना देंगे। इसके बाद 22 मई को कैंडल मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर फिर भी उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं तो वे हड़ताल करने को मजबूर होंगे। उन्होंने इसे 60 सालों के बाद होने वाली ऐतिहासिक हड़ताल करार दिया है।

बकौल बावेजा SBI में अधीनस्थ कर्मचारी लुप्त होने की कगार पर पहुंच गए हैं। बताया कि 1997 से अब तक संदेशवाहकों की भर्ती नहीं हुई है और 2022 में सशस्त्र गार्डों की भर्ती तो हुई लेकिन उसमें भी नाममात्र कर्मचारी भर्ती किए गए। इसके अलावा उन्होंने स्थाई नौकरियों को आउटसोर्सिंग के जरिए भरे जाने का भी विरोध किया है।

क्या हैं प्रमुख मांगें?

‘ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ फेडरेशन’ ने कुल 15 मांगों को लेकर हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। उनकी मांगों में संदेशवाहकों व सशस्त्र गार्डों की भर्ती करने, न्यू पेंशन स्कीम के कर्मियों के लिए पेंशन निधि बदलने का विकल्प देने और 2019 से कार्यरत कर्मचारियों के लिए इंटर सर्किल सर्कल ट्रांसफर देने की मांग शामिल है। इसके साथ ही स्थाई नौकरियों की आउटसोर्सिंग बंद करने, पर्याप्त कर्मचारियों की भर्ती करने व करियर प्रगति योजना की समीक्षा, मेडिकल रिंबरस्मेंट स्कीम में सुधार करने व कामगार निदेशक की नियुक्ति करने की मांग भी की गई है। 

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