राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम जमीन खरीद मामले में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है। उन्होंने मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त और 2017 बैच के आईएएस अफसर वरुण चौधरी को बर्खास्त करने की संस्तुति की है। 

यह कार्रवाई विजिलेंस की विस्तृत जांच में Criminal Conspiracy और Fraud के जरिए जमीन खरीदने-बेचने में नगर निगम को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर की गई है। इसके साथ ही तत्कालीन डीएम कर्मेंद्र सिंह को गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके खिलाफ मेजर पनिशमेंट की कार्रवाई की सिफारिश की गई है। 

वहीं, तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ एडवर्स एंट्री करने और उनके तीन सैलरी इंक्रीमेंट रोकने को कहा गया है। साथ ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य सतर्कता समिति की संस्तुति पर मामले में शामिल अफसरों, कर्मचारियों और जमीन बेचने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने की भी संस्तुति की गई है। 

जिन लोगों के खिलाफ केस दर्ज होना है उनमें तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी, तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, तत्कालीन कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, तत्कालीन एई और प्रभारी ईई आनंद सिंह मिश्राण, तत्कालीन सम्पत्ति लिपिक वेदपाल और तत्कालीन मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं। 

इसके अलावा जमीन बेचने वालों व अन्य संबंधित लोगों में सुमन देवी, जितेंद्र कुमार, अभिषेक यादव और सुजीत कुमार सिंह का नाम शामिल है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। 

गौरतलब है कि साल 2024 में नगर निकाय चुनाव के दौरान आचार संहिता लगी हुई थी। इस बीच हरिद्वार नगर निगम ने करीब 54 करोड़ रुपए में सराय गांव में 33 बीघा जमीन खरीदी। बताया जाता है कि इस जमीन की मार्केट वैल्यू करीब 13 करोड़ रुपए है। जब ये पूरा मामला सामने आया तब इस बात का भी खुलासा हुआ था कि जमीन खरीदने का उद्देश्य भी पता नहीं चला था।

Pahad News

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