हल्द्वानी। होली (Holi 2026) का पर्व बुधवार यानी 4 मार्च को धूमधाम से मनाया जाएगा। सभी लोग रंगों से सराबोर होंगे और हर ओर इंद्रधनुषी छठा बिखरी रहेगी। हर बार की तरह इस बार भी बाजार में तरह-तरह के अबीर, गुलाल और रंग मौजूद हैं। हालांकि, कई लोग इस बार होली पर हर्बल कलर्स को तरजीह दे रहे हैं लेकिन बाजार में केमिकल से बना रंग भी जमकर बिका है।
जानकारों का मानना है कि हर्बल के नाम पर भी काफी हद तक केमिकल से बना रंग बाजार में आया है। ऐसे में उल्लास व उमंग के पर्व होली पर स्किन और आंखों से जुड़ी समस्याएं होने की आशंका है। इसके मद्देनजर P4Pahadnews.com की टीम ने चर्म रोग विशेषज्ञ और नेत्र रोग विशेषज्ञ से बातचीत की है। डॉक्टरों ने लोगों को केमिकल रंगों से बचने की सलाह दी है।
सुशीला तिवारी अस्पताल में बतौर नेत्र रोग विशेषज्ञ तैनात डॉक्टर नितिन मेहरोत्रा ने बताया कि केमिकल वाले रंग आंखों के लिए काफी नुकसानदेह हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर सूखे रंगों में लेड ऑक्साइड और कॉपर सल्फेट जैसे खतरनाक रसायनों के साथ ही कांच का चूर्ण भी मिला होता है।
डॉक्टर मेहरोत्रा के मुताबिक, लिक्विड कलर्स को अक्सर एल्कलाइन बेस में तैयार किया जाता है जो आंखों के लिए एसिड से भी ज्यादा नुकसानदेह होता है। उन्होंने बताया कि ये केमिकल इतने घातक हैं कि इनसे आंखों की रोशनी तक जा सकती है। इसके साथ ही ये केमिकल आंखों में जलन, लालिमा और एलर्जी भी कर सकते हैं।
बकौल डॉक्टर मेहरोत्रा, वैसे तो लोगों को होली खेलने के दौरान अपनी आंखों का विशेष ख्याल रखना चाहिए लेकिन अगर फिर भी आंखों में रंग चला जाए तो आंख मसलने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि अगर प्रभावित शख्स ने कॉन्टैक्ट लेंस पहने हों तो सबसे पहले उन्हें निकालना चाहिए। दरअसल, कॉन्टैक्ट लेंस रंग में मौजूद हानिकारक रसायनों को सोखकर जमा करते हैं जो आंख के लिए काफी नुकसानदेह हो सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने प्रभावित शख्स की आंखों को ठंडे और साफ पानी से धोने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इस दौरान आंख में पानी डालने से बचना चाहिए। उन्होंने आंखें धोने की तकनीक भी बताई है। बकौल डॉक्टर मेहरोत्रा, हथेलियों को कप की तरह बनाकर पानी भरने के बाद उसमें (पानी में) आंखें खोलने की कोशिश के साथ ही बार-बार पलकें झपकाकर रंग धोने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए पीने का पानी या नल का पानी इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर आंख के अंदर कटे का निशान दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉक्टर मेहरोत्रा के मुताबिक, अगर आंखों में जलन, दर्द, खुजली या लालिमा कुछ घंटों से अधिक समय तक बनी रहती है या आंखों से पानी रिसता है तो जल्द-से-जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसके अलावा धुंधला दिखने, आंख या उसके आसपास से ब्लीडिंग होने या आंख में चोट लगने या पर भी अस्पताल जाना चाहिए।
सुशीला तिवारी अस्पताल में तैनात चर्म रोग विशेषज्ञ Dr. Pdiangty G Mawlong ने बताया कि जिन लोगों की स्किन सेंसेटिव है या जिन्हें एलर्जी की दिक्कत रहती है उन्हें केमिकल वाले रंगों से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार रंग के कारण होने वाली स्किन से जुड़ी दिक्कतें तुरंत न होकर 2-3 दिन बाद बढ़ती हैं।
डॉक्टर ने कहा कि सामान्य तौर पर गुलाल से दिक्कत नहीं होती लेकिन रंग परेशानी का सबब बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर जरुरी हो तो रंगों को पानी में डायल्यूट करने के बाद उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अधिकतम एक से दो घंटे में रंग को धोने की भी सलाह दी है।
उन्होंने कहा कि रंग खेलने से पहले बालों पर तेल और स्किन पर मॉइस्चराइजर लगाना चाहिए। इससे रंगों के घातक प्रभाव से बचने में मदद मिलती है। Dr Mawlong के मुताबिक, होली खेलने से पहले बालों की जड़ में तेल लगाने से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर होली खेलने के बाद किसी भी तरह की खुजली की शिकायत होती है और डॉक्टर के पास तुरंत जाना संभव न हो तो राहत के लिए दवा की दुकान से कैलामाइन लोशन खरीदकर प्रभावित हिस्से पर लगाया जा सकता है। उन्होंने प्रभावित लोगों को घरेलू उपाय न आजमाकर जल्द-से-जल्द विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेने की सलाह दी है।
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