प्रसिद्ध यात्रा लेखक पद्मश्री ह्यूग गैंटजर का निधन
देहरादून। ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ के नाम से मशहूर मसूरी में मंगलवार को प्रसिद्ध यात्रा लेखक और पद्मश्री से सम्मानित ह्यूग गैंटजर का 95 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने किंक्रेग लाइब्रेरी रोड स्थित अपने घर ओक ब्रुक में अंतिम सांस ली। उनके निधन से इलाके में शोक की लहर है।
9 जनवरी 1931 को पटना में जन्मे गैंटजर के पिता जेएफ गैंटजर ब्रिटिश काल में मसूरी म्युनिसिपल बोर्ड के चेयरमैन रह चुके थे। वह मसूरी के सेंट जॉर्ज कॉलेज और नैनीताल के सेंट जोसेफ कॉलेज के एलुमनाई रह चुके हैं। ह्यूग नौसेना के कमांडर पद से रिटायरमेंट के बाद मसूरी में ही रह रहे थे। ह्यूग ने रिटायरमेंट के बाद अपनी पत्नी कोलीन गैंटजर के साथ यात्रा लेखक के रूप में दुनिया में अपना मुकाम बनाया।
ह्यूग व उनकी पत्नी कोलीन ने करीब पांच दशक से ज्यादा समय तक दूर-दराज़ इलाकों की यात्राएं कीं। उन्हें कई जगहों की स्थानीय विरासत और अलग-अलग संस्कृतियों के साथ ही कई अनछुए पहलुओं को दुनिया के सामने लाने का श्रेय जाता है। इस दरमियान उनकी 30 से ज्यादा किताबें छपीं। इसके अलावा हजारों आर्टिकल अलग-अलग पत्र-पत्रिकाओं में छपे। खबरों के मुताबिक, उनकी 52 डॉक्यूमेंट्रीज दूरदर्शन पर प्रसारित हुई थीं।
भारत सरकार ने ह्यूग व उनकी पत्नी कोलीन के साहित्य और शिक्षा व यात्रा पत्रकारिता में योगदान को देखते हुए दंपति को 2025 में पद्मश्री सम्मान से नवाजा था। इसके साथ ही उन्हें कई अन्य सम्मान और पुरस्कार भी मिले थे। इनमें पैसिफिक एशिया ट्रैवल एसोसिएशन से गोल्ड अवार्ड और राष्ट्रीय पर्यटन लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड भी शामिल हैं।
यात्रा लेखन के साथ ही ह्यूग को हिमालय के पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जाना जाता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ह्यूग ने मसूरी में बेतरतीब चूना पत्थर खनन और अनियंत्रित निर्माण के खिलाफ आवाज उठाई थी। दरअसल, चूना पत्थर खनन और अनियंत्रित निर्माण से पर्यावरण को खतरा पैदा हो गया था। बकौल रिपोर्ट्स, जब उनकी आवाज तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक पहुंची तब इलाके में खनन पर रोक लगाई गई थी। इसके अलावा ह्यूग, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनाई गई पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य भी रहे।
गौरतलब है कि ह्यूग गैंटजर की पत्नी कोलीन गैंटजर का निधन करीब एक साल पहले हो गया था। कोलीन ने निधन 6 नवंबर 2024 को अंतिम सांस ली थी। इलाके के लोगों का मानना है कि अब ह्यूग के निधन के साथ ही यात्रा लेखन के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। ह्यूग का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह कैमेल्स बैक स्थित पारिवारिक कब्रिस्तान में किया जाएगा।
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