Uttarakhand की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को नए दृष्टिकोण से पेश करने के उद्देश्य से ‘चीर बंधन’ पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की गई है। ‘Cheer Bandhan: A Traditional Festival and A Form of Psychological Healing’ नाम से बनी इस डॉक्यूमेंट्री को यूट्यूब चैनल ‘Crying Baby Creativity Zone’ पर रिलीज किया गया है।
इस वृत्तचित्र में ‘चीर बंधन’ के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व पर चर्चा की गई है। डॉक्यूमेंट्री में बताया गया है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ और बढ़ते मानसिक तनाव के बीच ऐसी लोक परंपराएं लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ सामूहिक जुड़ाव और सकारात्मक ऊर्जा का भी माध्यम बनती हैं।
डॉक्यूमेंट्री में विषय विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों ने चीर बंधन के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार साझा किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सामूहिक सहभागिता, भावनात्मक जुड़ाव और सांस्कृतिक निरंतरता को भी मजबूत करती है। डॉक्यूमेंट्री में यह भी बताया गया है कि किस प्रकार यह परंपरा लोगों के बीच सामाजिक समरसता और सामूहिक चेतना को बढ़ावा देती है।
डॉक्यूमेंट्री का फिल्मांकन अल्मोड़ा जिले के सोमेश्वर स्थित माला और आसपास के इलाकों में होली के दौरान हुए चीर बंधन कार्यक्रम के दौरान किया गया है। इसमें समाजशास्त्र की रिटायर्ड प्रोफेसर इला साह, मनोविज्ञान की रिटायर्ड प्रोफेसर आराधना शुक्ला, डॉ. रुचि तिवारी, डॉ. ललित योगी, त्रिभुवन गिरी महाराज और स्थानीय ग्रामीणोंने चीर बंधन के मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और धार्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की है।
विपुल जोशी के निर्देशन में बनी इस डॉक्यूमेंट्री में सुनिता भास्कर ने वॉइस ओवर दिया है जबकि इसकी एडिटिंग अतुल त्रिपाठी ने की है। विपुल ने बताया कि इस डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और लोक परंपराओं के उन पहलुओं को सामने लाना है, जो आधुनिक समाज में भी प्रासंगिक बने हुए हैं।
विपुल पहले भी मनोविज्ञान से जुड़े मसलों पर काम कर चुके हैं। करीब 3-4 महीने पहले आई उनकी शॉर्ट फिल्म ‘प्रोजेक्ट रूपांतरण’ को भी लोगों ने काफी सराहा था। इसी यूट्यूब चैनल पर रिलीज हुई ‘प्रोजेक्ट रूपांतरण’ शॉर्ट फिल्म को अब तक करीब 1500 लोग देख चुके हैं।
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